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शिक्षक एक राष्ट्रद्रष्टा।

व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की बड़ी भूमिका होती है। शिक्षक साक्षर करने के साथ साथ दृष्टि सम्पन्न भी करता है।यह सम्मान शिक्षकों के कर्तव्य, संस्कार और दायित्व का सम्मान है। मूल्यहीनता तथा युवा पीढ़ी के इस भटकाव के और ये शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती है। जिसे उन्हें अपने महान शिक्षकों और गुरुओं का स्मरण करते हुए समाज निर्माण के हित में स्वीकारना चाहिए। ईश्वर और प्रकृति के अलावा जिन शिक्षकों का आज भी स्मरण किया जाता है उनमे चाणक्य समर्थ गुरु रामदास, रामकृष्ण परमहंस जैसे भारतीय शिक्षकों के साथ ही अरस्तू, सुकरात जैसे विष्वविख्यात शिक्षक हमारे आदर्श हैं। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन राष्ट्रपति के पद से ज्यादा शिक्षक के पद से गौरवान्वित होते रहे रहे हैं। न्यूज़लाइन नेटवर्क अपने समाज के पथ प्रदर्शक तथा आलोक पुरुष शिक्षकों का सम्मान करते हुए अपेक्षा करता है कि आप जब संकल्प, संस्कार, संस्कृति और सदभाव को लेकर समाज के सामने होंगे तो समाज आपके प्रति हार्दिक कृतज्ञता के साथ विनम्र भाव से अर्पित होते हुए गौरवान्वित होगा।
लेख- संजय पंकज।

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