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पत्रकारिता मे कड़वा है मगर सच है

लेख-अजित पांडेय, सिंगरौली, मध्यप्रदेश
कोई बाद विवाद य लड़ाई हो तो पत्रकारों को बुलाओ...
सड़क नही बन रही तो पत्रकारों को बुलाओ...
पानी य बिजली नही है तो पत्रकारों को बुलाओ...
नेता गिरी में हाईलाइट होना है तो पत्रकारों को बुलाओ...
नेतागिरी चमकानी हो तो पत्रकारो को बुलाओ...
पुलिस य अधिकारी नही सुन रहे तो पत्रकारों को बुलाओ...
शासन प्रशासन के अधिकारी नही सुन रहे तब भी पत्रकारों को बुलाओ...

जनता की हर छोटी बडी समस्या के लिए पत्रकार हमेशा हाजिर हो जाते है,
बिना धूप / बारिश की चिंता किए बिना और अपने कर्तव्यों का वो बखूबी निर्वहन भी करते है,
क्योकि ••
पत्रकार किसी भीड़ का हिस्सा नहीं होता , वह कार्य करने के लिये स्वतंत्र होता है,
पत्रकार सबको समान रूप से मानता है, चाहे कोई बड़ा ओह्दे दार हो य गांव का आम आदमी, वह समाज में आपके हक के लिए लड़ता है, आपकी आवाज सत्ता मे बैठे जिम्मेदार लोगो तक पहुंचाता है,
लेकिन हर प्रकार की भीड़ जो पत्रकार और पत्रकारिता का हिस्सा जरूर होता है,

लेकिन.....
लेकिन......
लेकिन..... ❓

जब पत्रकारों पर कोई समस्या य हमला होता है तब वही आम जनता, राजनेता, और समाजसेवी पत्रकारों का साथ देने आगे क्यो नही आते ?
जरा सोचिए ••

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