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चंद्रयान पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी का बयान

आधी रात का वक्त था और पूरा देश बड़ी ही बेसब्री से लैंडर विक्रम के चांद की धरती को चूमने और खुशी में झूमने का इंतजार कर रहा था। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ, लेकिन यह भारत और इसरो की असफलता नहीं है। स्पेस साइंस में भारत ने चंद्रयान-2 के जरिए नया इतिहास रचा है। चांद पर उतर रहे लैंडर विक्रम से भले ही संपर्क टूट गया, लेकिन सवा अरब भारतीयों की उम्मीदें नहीं टूटी हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित तमाम नेताओं ने इसरो से कहा है कि देश को उन पर गर्व है।देर रात करीब 1.51 बजे चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी दूर इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया। चंद्रयान-2 की कुल लागत 978 करोड़ रुपये है और भले ही लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया हो, ऑर्बिटर से अब भी इसरो और पूरे देश को उम्मीदें हैं। ऑर्बिटर विक्रम से भले ही उम्मीदें टूट गई हों, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसे मिशन पर हाथ डाला, जिसकी सफलता को लेकर पहले ही दिन से संशय की स्थिति थी। शायद यही कारण है कि इसरो पहले से ही अंतिम 15 मिनट को बेहद खतरनाक और महत्वपूर्ण मान रहा था। चंद्रयान-2 मिशन को पूरी तरह से फेल नहीं कहा जा सकता है, इसलिए भारत की इस स्पेस एजेंसी को तमाम लोग बधाई दे रहे हैं। सभी ने कहा कि आपकी उपलब्धियों पर हमें गर्व है।

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