भक्ति ज्ञान वैराग्य से ओतप्रोत भारत – हिमान्शु महाराज

भक्ति ज्ञान वैराग्य से ओतप्रोत भारत – हिमान्शु महाराज

न्यूज़लाइन नेटवर्क, मुंगेली ब्यूरो
लोरमी : भारत का इतिहास अति प्राचीन है।भारत विश्व की सभ्यता व संस्कृति की जननी है।चारो वेद छह शास्त्र अठारह पुराण भगवत गीता ,महाभारत व रामायण जैसे ग्रन्थ विश्व की अमूल्य धरोहर है।यहा के ग्रन्थो मे खगोल भूगोल आयुर्वेद योग विज्ञान आध्यात्म जैसे सभी विषयो का प्रामाणिक वर्णन है।दक्ष प्रजापति के द्वारा साठ कन्याओ की उत्पत्ति बेटी बचाओ, बेटी पढाओ जैसे योजनाओ की जननी है।आसुरी वृत्ति ही वृत्रासुर है ,जिसका वध दैवीय प्रवृत्ति से युक्त महान राष्ट्र भक्त व देहदानी महर्षि दधीचि के हड्डियो से बने बज्र द्वारा ही संभव हो पाया।अहंकार व्यकि के पतन का।कारण है,इससे सदैव बचने व लोगो को बचाने का प्रयास करते रहना चाहिए ।पाच वर्ष के प्रह्लाद सनातन धर्म के महान संरक्षक व संवर्धक है जिन्होने अपने पिता हिरण्यकश्यप के सनातन विरोधी, भगवान श्रीराम विरोधी विचारधारा का विरोध संसार की कठिन से कठिन यंत्रणा सहकर किया।परिणाम स्वरूप सनातन धर्म की रक्षा व प्रह्लाद के दृढ विश्वास की रक्षा हेतु खंभे से नरसिंह रूप मे प्रकट होकर भगवान ने धर्म का ध्वजारोहण तथा ईश्वर की सर्व व्यापकता का प्रकटीकरण किया। पाच सौ वर्षो की कठिन संघर्षो के बाद अयोध्या मे प्रभु श्रीराम के मंदिर का निर्माण भारत सहित विश्व के लिए गौरव व गर्व का विषय है।भगवान श्रीराम जहा विश्व की आत्मा है वही छत्तीसगढ वासियो की बहन कौशल्या के पुत्र होने के नाते भान्जा जी है।यह विचार नवरंगपुर निवासी सिद्ध राम राधेश्याम ठाकुर के निवास पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ पर विराजमान श्रद्धेय पण्डित डाक्टर सत्यनारायण तिवारी हिमान्शु महाराज ने कथा के तीसरे दिन व्यक्त किए। उक्त अवसर पर कोमलगिरि गोस्वामी,सुरेन्द्र पाण्डेय, पंडित नीरज तिवारी पंडित दिनेश दुबे पंडित प्रमोद पाठक पंडित मुकेश शर्मा रामभरोस ठाकुर बोधीराम साहू प्रेमनारायण लोनिया पंडित ब्रम्हानंद त्रिपाठी तुलसीराम साहू सहित सैकड़ो श्रद्धालु नर नारी उपस्थित थे।प्रतिदिन सुन्दर झांकियो का प्रदर्शन किया जा रहा है।

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