क्या है कॉकरोच जनता पार्टी? जानिए कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्यों हुई वायरल

सीजेपी क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसके संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके हैं। उन्होंने बीबीसी न्यूज़ मराठी से बातचीत में बताया कि इस ऑनलाइन अभियान की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और इसका विचार कैसे विकसित हुआ।
अभिजीत के मुताबिक, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भारत के मुख्य न्यायाधीश से जुड़ा एक बयान देखा। उनका दावा है कि उस बयान में व्यवस्था की आलोचना करने वाले युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से की गई थी। इस टिप्पणी ने उन्हें असहज और निराश महसूस कराया।
उन्होंने कहा कि संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है और ऐसे में लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े लोगों से भी इसी भावना की अपेक्षा की जाती है। इसी सोच के साथ उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि अगर तथाकथित “कॉकरोच” एक मंच पर आ जाएं तो क्या होगा।
अभिजीत बताते हैं कि उनकी पोस्ट पर बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रतिक्रिया दी और एक साझा मंच बनाने का सुझाव दिया। इसके बाद उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से एक ऑनलाइन पैरोडी प्लेटफ़ॉर्म शुरू करने का फैसला किया।
उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में सदस्यता की कुछ शर्तें भी रखीं, जिनमें आलसी होना, बेरोज़गार होना और लगातार ऑनलाइन सक्रिय रहना जैसी बातें शामिल थीं। उनका कहना है कि जिन शब्दों का इस्तेमाल युवाओं को लेकर किया गया, उन्हीं को उन्होंने पार्टी की पात्रता में बदल दिया।
शुरुआत के कुछ ही समय में इस पहल को सोशल मीडिया पर तेज़ प्रतिक्रिया मिलने लगी और बड़ी संख्या में लोगों ने खुद को इससे जोड़ना शुरू कर दिया। इसके बाद टीम ने वेबसाइट तैयार की, घोषणापत्र जारी किया और इस अभियान को एक बड़े डिजिटल आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया।
इस पहल को समर्थन क्यों मिला?
अभिजीत के अनुसार, इस अभियान को कई चर्चित व्यक्तियों का समर्थन मिला। उन्होंने बताया कि पूर्व क्रिकेटर और सांसद कीर्ति आज़ाद ने इसमें रुचि दिखाई, जबकि सांसद महुआ मोइत्रा ने भी समर्थन व्यक्त किया।
डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियानों की लोकप्रियता अक्सर युवाओं की भावनाओं, असंतोष और सोशल मीडिया की ताकत से जुड़ी होती है।
अभिजीत का कहना है कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि बड़ी संख्या में जुड़े लोगों की भागीदारी का परिणाम है। उनके अनुसार, युवाओं के भीतर लंबे समय से मौजूद असंतोष और अवसरों को लेकर चिंता ने इस प्रतिक्रिया को गति दी।
कौन हैं अभिजीत दीपके?
अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से आते हैं। उच्च शिक्षा के लिए वे पुणे गए और बाद में कुछ समय तक आम आदमी पार्टी की कम्युनिकेशन टीम के साथ काम किया।
उनका कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर काम करने की वजह से उनकी रुचि राजनीति में बनी। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई पर ध्यान दिया और बाद में उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी में अध्ययन का अवसर मिला, जहां उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
घोषणापत्र में क्या प्रमुख बातें हैं?
अभिजीत का मानना है कि पार्टी का घोषणापत्र भारत के लोकतंत्र और वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने की कोशिश करता है। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संस्थाओं की निष्पक्षता और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषयों को प्रमुखता दी।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि लंबे समय से आरक्षण की चर्चा होती रही है और उनके अनुसार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अधिक प्रभावी कदमों की आवश्यकता है।

