विकास के दावों की जमीनी हकीकत: मुंगेली के बिसौनी गांव में ग्रामीणों ने खुद संभाली सड़क सुधार की कमान


न्यूजलाइन नेटवर्क, मुंगेली ब्यूरो
मुंगेली : एक तरफ जहां सरकार ‘विकसित भारत 2047’ का सपना बुन रही है, वहीं छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के वनांचल क्षेत्र में ग्राम पंचायत महामाई के बिसौनी से आई तस्वीरें सरकारी दावों की पोल खोल रही हैं। यहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहे ग्रामीणों ने अब हार मानकर स्वयं ही सड़क सुधारने का बीड़ा उठा लिया है।
गांव की बदहाल सड़कों के कारण स्कूली बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है। स्थिति इतनी खराब है कि कीचड़ और गड्ढों के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने चंदा जुटाया और श्रमदान कर खुद सड़क की मरम्मत करने का निर्णय लिया।
सड़क की समस्या के अलावा, गांव में महीनों से खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रोशनी की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू व छत्तीसगढ़ सरकार में उपमुख्यमंत्री अरूण साव का गृह विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी सुध लेने नहीं पहुंचा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब गांव के विकास, सड़क और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और पंचायतों की है, तो फिर उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई से चंदा जुटाकर सड़क क्यों बनानी पड़ रही है?
यह स्थिति केवल बिसौनी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई सुदूर वनांचल क्षेत्रों की यही हकीकत है, जहां विकास के दावे फाइलों तक सिमटकर रह गए हैं। सवाल यह है कि यदि हर समस्या का समाधान ग्रामीणों को ही करना है, तो फिर सरकारी बजट और विभागों की जवाबदेही किसकी है?
क्या प्रशासन ‘विकसित भारत 2047’ के इंतजार में बैठा रहेगा या इन वनांचल क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान जल्द करेगा?
यह विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और मुंगेली के बिसौनी का बताया जा रहा है, न्यूज़लाइन नेटवर्क प्रशासन की ओर से अधिकारिक बयान आने तक इसकी पुष्टि नहीं करता है।

