लोरमी में ‘मृत’ हितग्राही के नाम पर राशन का खेल : जांच के नाम पर खानापूर्ति, आरोपियों को मोटी रिश्वत लेकर दिया जा रहा संरक्षण

लोरमी में ‘मृत’ हितग्राही के नाम पर राशन का खेल : जांच के नाम पर खानापूर्ति, आरोपियों को मोटी रिश्वत लेकर दिया जा रहा संरक्षण

न्यूज़लाइन नेटवर्क, मुंगेली ब्यूरो
मुंगेली/लोरमी: छत्तीसगढ़ के लोरमी जनपद पंचायत क्षेत्र में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जहाँ एक मृत महिला के राशन कार्ड का उपयोग कर वर्षों से सरकारी अनाज का अवैध आहरण किया जा रहा है। मामले की शिकायत विभाग,कलेक्टर और मुख्यमंत्री जनदर्शन तक किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

मृतका के नाम पर 5-6 वर्षों से राशन का गबन
आरटीआई कार्यकर्ता खेमेश्वर पुरी गोस्वामी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राशनकार्ड क्रमांक 226476454326 की मूल हितग्राही श्रीमती बुधवरिया का निधन 17 नवंबर 2019 को हो गया था। आरोप है कि मृत्यु के करीब 5 माह बाद, उनके नाती शिवकुमार साहू ने कूटरचित (फर्जी) आवेदन प्रस्तुत कर अपने नाबालिग पुत्र देवदत्त का नाम राशन कार्ड में दर्ज करवा लिया। इस जालसाजी के जरिए पिछले 5-6 वर्षों से शासन के राशन का अवैध आहरण कर सरकारी खजाने को लाखों रुपये की चपत लगाई जा रही है।

अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
इस गंभीर मामले की जांच की कमान जनपद पंचायत लोरमी के अधिकारियों को सौंपी गई थी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी आज दिनांक तक कोई जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी गई है। जब इस संबंध में जांच टीम के एक अधिकारी से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि पंचायत सरपंच से नाम कटवाने का प्रस्ताव देने कहा गया था सरपंच की ओर से राशनकार्ड से नाम काटने आवेदन दिया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोषी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316, 318, 336 के तहत एफआईआर दर्ज कर राशि की वसूली की जानी चाहिए। इसके बजाय, जनपद पंचायत के अधिकारी आरोपी को बचाने के लिए मोटी रिश्वत लेकर उन्हें संरक्षण दे रहे हैं।

जनदर्शन में बार-बार गुहार, पर ढाक के तीन पात
इस मामले को लेकर बीते दो वर्षों से लगातार विभाग से लेकर कलेक्टर जनदर्शन (टोकन क्रमांक 14863, दिनांक 30/12/2025 और टोकन क्रमांक 13203, दिनांक 16/09/2025) तक शिकायतें की जा चुकी हैं। ताजा शिकायत 8 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री के समक्ष की गई है। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं होती है,तो वे उच्च न्यायिक शरण लेने के लिए विवश होंगे। और जांच अधिकारियों समेत विभागीय अधिकारियों को भी सह आरोपी बनाया जाने की मांग करेंगे।
यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किसी दबाव में अधिकारी इस भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं या मोटी रिश्वत मिलने से आरोपी के आगे नतमस्तक हैं..?

