बाँध का पानी सूखते ही बाहर आया ‘सदियों पुराना’ पांडवकालीन कांबरेश्वर मंदिर, श्रद्धालुओं की लगी भीड़

बाँध का पानी सूखते ही बाहर आया ‘सदियों पुराना’ पांडवकालीन कांबरेश्वर मंदिर, श्रद्धालुओं की लगी भीड़

न्यूज़लाइन नेटवर्क, डेस्क ब्यूरो
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले में इन दिनों एक अद्भुत और रहस्यमयी नजारा चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ स्थित एक बाँध के जलस्तर में गिरावट आने के बाद, पानी के भीतर सदियों से डूबा हुआ एक प्राचीन मंदिर सतह पर आ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर पांडवकालीन है और इसका नाम ‘कांबरेश्वर मंदिर’ बताया जा रहा है। इसका मूल नाम ‘कर्महरेश्वर‘ बताया जाता है, लेकिन कांबरे गाँव में स्थित होने के कारण इसे कांबरेश्वर कहा जाता है।
पानी घटते ही दिखने लगा मंदिर का शिखर
पुणे के पास स्थित इस बाँध में भीषण गर्मी और पानी के इस्तेमाल के कारण जलस्तर काफी नीचे चला गया है। जैसे ही जलस्तर कम हुआ, पानी के अंदर समाई हुई प्राचीन वास्तुकला धीरे-धीरे बाहर आने लगी। देखते ही देखते मंदिर का पूरा ढांचा, नक्काशीदार खंभे और शिखर पानी से ऊपर आ गए। इस घटना ने आसपास के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया है।
क्या है इसकी खासियत?
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसके गर्भगृह में स्थित रहस्यमयी शिवलिंग है। पुरातत्व प्रेमियों का कहना है कि यह शिवलिंग सालों से पानी के अंदर रहने के बावजूद आज भी पूरी तरह सुरक्षित है।
स्थापत्य कला: मंदिर की बनावट प्राचीन भारतीय शैली की है, जो इसकी भव्यता को दर्शाती है।
पांडवकालीन मान्यता: स्थानीय निवासियों और जनश्रुतियों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया था, हालांकि इस पर आधिकारिक पुरातात्विक शोध होना अभी बाकी है।
आस्था का केंद्र बना मंदिर
जैसे ही मंदिर के बाहर आने की खबर फैली, पुणे और आसपास के इलाकों से श्रद्धालुओं का तांता लग गया। लोग इस ‘जलमग्न मंदिर’ के दर्शन करने और इसकी ऐतिहासिक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े हैं। कई लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।
इतिहास के पन्नों में दब गई थी विरासत
जानकारों का मानना है कि जब यह बाँध बनाया गया था, तब कई गांव और प्राचीन मंदिर जलमग्न हो गए थे। कांबरेश्वर मंदिर भी उसी दौरान पानी के भीतर चला गया था। दशकों तक यह मंदिर पानी की गहराई में छिपा रहा, लेकिन प्रकृति के चक्र ने आज इसे एक बार फिर लोगों के सामने ला खड़ा किया है।
फिलहाल, इस अनूठे नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक बाँध के किनारे पहुँच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मंदिर का संरक्षण किया जाना चाहिए ताकि हमारी प्राचीन विरासत को बचाया जा सके।

