
कवि विजय कुमार कोसले ने अनेक सच्चे और कर्मशील इंसानों के गुणों को अपनी कविता में पिरोकर समाज व दुनिया को दिया एक नया संदेश :: जरूर पढ़े कविता शीर्षक – कर्मठ जीवन के दस वसूल।
! कर्मठ जीवन के दस वसूल!
1.सदा ही सत्य की राह चलिए,
धैर्य विश्वास जीवन में रखिए।
2.कभी न किसी से छल कपट करो,
समय और सत्य से कुछ (थोड़ी) तो डरो।
3.न पीये कभी शराब विस्की रम,
आतें हैं इनसे जीवन में दुःख विवाद और गम।
4.पैसा कहां हरपल काम आतें हैं,
बड़े बड़े धनवान भी ईश्वर भक्ति के गुण गाते है।
5.कभी न रोकें किसी की बनते काम,
एक दिन चुकानी पड़ती है हर बुरे कर्मो का दाम।
- न बोलें कभी हम जीवन में कोई भी झूठ,
अन्यथा लेगी ज़िन्दगी हमसे सब मान सम्मान लूट। 7.झूठ के दम से कोई बनते नहीं ज्ञानी,
कठीन परिश्रम में बीती होती है जवानी।
8.पाप पुण्य को सत्य मानों,
बुरा कर्म कर न जीवन में अशांति लानों।
9.नहीं कोई है भाग्य और भगवान से बड़ा,
बड़े बड़े धनवान के जीवन में भी है दुखों का पहाड़ खड़ा।
10.ईश्वर भक्ति गुण हरपल गाओ,
धन दौलत की लालच लोभ मिटाओ।
लेखक /कवि,
विजय कुमार कोसले,
नाचनपाली, लेन्ध्रा छोटे
सारंगढ़, छत्तीसगढ़ ।
मो.-6267875476