मुंगेली में गरीबों के निवाले पर डाका: दो महीने से नहीं मिली शक्कर, सरकारी दावे ठंडे

मुंगेली में गरीबों के निवाले पर डाका: दो महीने से नहीं मिली शक्कर, सरकारी दावे ठंडे

मुंगेली में गरीबों के निवाले पर डाका: दो महीने से नहीं मिली शक्कर, सरकारी दावे ठंडे

न्यूज़लाइन नेटवर्क, मुंगेली ब्यूरो 

मुंगेली : छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन’ और ‘गरीबों के कल्याण’ के बड़े-बड़े दावों की पोल मुंगेली जिले में खुलती नजर आ रही है। मुंगेली के हजारों बीपीएल कार्डधारी पिछले दो महीनों से अपनी पात्रता की शक्कर के लिए सरकारी राशन दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ ही घर लौटना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर गरीबों के हिस्से की मिठास गायब कौन कर रहा है?

 

मुंगेली जिले की राशन दुकानों पर पिछले 60 दिनों से सन्नाटा पसरा है। कार्डधारियों का आरोप है कि उन्हें राशन तो दिया जा रहा है, लेकिन अंत्योदय और प्राथमिकता कार्ड में मिलने वाली शक्कर का अता-पता नहीं है। दुकानदार भी ऊपर से आपूर्ति न आने का रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं: क्या शासन स्तर से शक्कर का उठाव नहीं हुआ है या जिले के गोदामों में आकर यह शक्कर ‘ब्लैक’ हो रही है?

 

एक ओर सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों में गरीबों को हर सुविधा देने का दम भरती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी राशन के लिए भी उन्हें तरसाया जा रहा है। मुंगेली का खाद्य विभाग और जिला प्रशासन आखिर किस गहरी नींद में सो रहा है?

 

स्थानीय हितग्राहियों का कहना है, “हमें फ्री का राशन नहीं चाहिए, हम अपना हक मांग रहे हैं। दो महीने से शक्कर नहीं मिली, तो क्या वह सरकार डकार गई?”

तपती गर्मी में राशन दुकानों के चक्कर काट रहे बुजुर्ग और मजदूर अब थक चुके हैं। उनकी नाराजगी साफ है कि अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर सकती, तो बड़े-बड़े दावों का ढिंढोरा पीटना बंद करे।

 

क्या मुंगेली कलेक्टर और खाद्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर तत्काल वितरण शुरू करवाएंगे, या फिर आने वाले दिनों में भी गरीबों को अपनी ही शक्कर के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा?

मिठास छीनने वाली इस ‘सरकारी लापरवाही’ पर अब जनता का सब्र टूट रहा है। देखना होगा कि प्रशासन इस पर कब तक चुप्पी तोड़ता है।

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