राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल: सुरक्षा और भोग-प्रसाद के नाम पर करोड़ों के खर्च की जांच की मांग

राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल: सुरक्षा और भोग-प्रसाद के नाम पर करोड़ों के खर्च की जांच की मांग

न्यूज़लाइन नेटवर्क, डेस्क ब्यूरो
अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर विवादों के घेरे में है। दान पेटियों से राशि चोरी के मामले की जांच के बीच, अब ट्रस्ट द्वारा किए गए भारी-भरकम खर्चों पर सवालिया निशान लग गए हैं। ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि सुरक्षा और भोग-प्रसाद के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, जिसकी पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर ट्रस्ट के भीतर और बाहर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।
सुरक्षा पर 10 करोड़ का खर्च, जब सुरक्षा का जिम्मा सरकार का?
वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच (11 महीने) मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह राशि औसतन एक करोड़ रुपये प्रति माह बैठती है। बड़ा सवाल यह है कि जब राम मंदिर परिसर में केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस बल और अत्याधुनिक निगरानी तंत्र चौबीसों घंटे तैनात हैं, तो फिर ट्रस्ट के खजाने से इतनी बड़ी राशि किस मद में और किसे दी गई? जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस खर्च की प्रक्रिया क्या थी और इसे किस स्तर पर स्वीकृति मिली।
भोग-प्रसाद पर भी 11 करोड़ का भारी खर्च
सुरक्षा के साथ-साथ भोग-प्रसाद के मद में भी 11 महीनों में करीब 11 करोड़ रुपये का व्यय दिखाया गया है। एक करोड़ रुपये प्रति माह के इस खर्च की निगरानी और व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। दानदाताओं का मानना है कि आस्था के इन केंद्रों पर होने वाले खर्चों में स्पष्टता और ऑडिट का अभाव वित्तीय कुप्रबंधन की ओर इशारा करता है।
ट्रस्ट के भीतर ‘कंट्रोल’ को लेकर गंभीर आरोप
सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट के 15 सदस्यीय बोर्ड में से 12 सदस्य निर्णय प्रक्रिया से लगभग बाहर हैं। आरोप है कि ट्रस्ट के सभी महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय कुछ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमट गए हैं। विशेष रूप से गोपाल राव की भूमिका और निर्णयों को लेकर ट्रस्ट के भीतर ही सुगबुगाहट तेज है। सदस्यों द्वारा खुलकर सवाल न उठा पाने की स्थिति ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता के गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
आय-व्यय का विवरण (1 अप्रैल 2025 – 28 फरवरी 2026):
| मद | विवरण |
|दान से कुल आय | ~83 करोड़ रुपये |
|बैंक ब्याज से आय | ~138 करोड़ रुपये |
| निर्माण कार्य (मुख्य) | 152 करोड़ रुपये |
| परकोटा/दीवार निर्माण | 87 करोड़ रुपये |
|सुरक्षा व्यय| 10 करोड़ रुपये |
| भोग-प्रसाद व्यय | 11 करोड़ रुपये |
| भूमि खरीद (सुविधा केंद्र हेतु)| 26.69 करोड़ रुपये |
जांच की सुई घूमी, क्या खुलेगी वित्तीय परतें?
एसआईटी (SIT) की जांच अब केवल दान पेटी चोरी तक सीमित नहीं रहेगी। जिस प्रकार से सुरक्षा और भोग-प्रसाद के नाम पर करोड़ों का फंड खर्च किया गया है, उससे स्पष्ट है कि अब ट्रस्ट की वित्तीय मंजूरियों और ऑडिट प्रक्रिया की भी गहराई से जांच होगी। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में दानदाताओं के पैसे की जवाबदेही तय करना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

