मुंगेली जिला पंचायत की बैठक में ‘पतिदेवों’ का कब्जा, सरकारी नियमों की उड़ रही धज्जियां

मुंगेली जिला पंचायत की बैठक में ‘पतिदेवों’ का कब्जा, सरकारी नियमों की उड़ रही धज्जियां

महिला प्रतिनिधियों की जगह बैठक में सक्रिय रहे पति, प्रशासन मूकदर्शक

न्यूजलाइन नेटवर्क , स्टेट ब्यूरो

मुंगेली: जिला पंचायत मुंगेली में एक बार फिर सरकारी आदेशों और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं की धज्जियां उड़ाई गई हैं। बुधवार को जिला पंचायत की सहकारिता एवं उद्योग स्थायी समिति की बैठक संपन्न हुई, जिसमें महिला जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बजाय उनके पतियों का दबदबा साफ़ दिखाई दिया। दिलचस्प बात यह है कि जनसंपर्क विभाग ने स्वयं ऐसी तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों के पति बैठक में बाकायदा बैठकर चर्चा करते और निर्देश देते नजर आ रहे हैं।

सरकार के सख्त निर्देशों को ठेंगा

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी बैठकों में जनप्रतिनिधियों के पति (प्रतिनिधि के रूप में) हिस्सा नहीं ले सकते और न ही निर्णय प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके बावजूद, मुंगेली जिला पंचायत में इन नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा है। महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर उनके पति सत्ता का संचालन कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर शासन की ‘महिला स्वावलंबन’ की नीति का अपमान है।

प्रशिक्षण शिविर के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

यह कोई पहला मामला नहीं है। इसी वर्ष जून के पहले सप्ताह में एक प्रशिक्षण शिविर के दौरान भी इसी प्रकार का मामला सामने आया था। तब भी महिला जनप्रतिनिधियों के पतियों ने न केवल शिविर में भाग लिया था, बल्कि सक्रिय भूमिका निभाई थी। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बावजूद जिला पंचायत प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अब दोबारा वही पुनरावृत्ति यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या जिला पंचायत प्रशासन केवल ‘पतिदेवों’ के इशारे पर नाच रहा है?

अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल

बैठक में समिति की सभापति श्रीमती अनिता साहू समेत अन्य महिला सदस्य उपस्थित थीं, लेकिन उनके साथ बैठे पतियों की उपस्थिति ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि जब बैठक में विभागीय अधिकारी मौजूद थे, तो उन्होंने नियमों के उल्लंघन पर आपत्ति क्यों नहीं जताई? क्या विभागीय अधिकारी भी नियमों को ताक पर रखकर ‘पतियों’ की धौंस के आगे नतमस्तक हैं?

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें, किरकिरी का दौर

तस्वीरों में पति की सक्रिय भागीदारी ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। आम नागरिकों का कहना है कि यदि महिलाओं को चुनकर भेजा गया है, तो निर्णय वे ही क्यों नहीं लेतीं? प्रशासन की इस ढिलाई से सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।

क्या कहते हैं नियम?

शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि ही बैठकों में भाग लेंगी। पतियों की हस्तक्षेपकारी भूमिका पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं, ताकि महिलाओं को निर्णय लेने में स्वतंत्र और सशक्त बनाया जा सके।

अब देखना यह है कि क्या शासन के सख्त निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा, या फिर मुंगेली जिला पंचायत में इसी तरह ‘पति राज’ चलता रहेगा?

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