आज की बड़ी खबर: डोनेशन विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट की आपात बैठक

आज की बड़ी खबर: डोनेशन विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट की आपात बैठक

अयोध्या, 06 जुलाई 2026:

उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या का राम मंदिर एक बार फिर देश के केंद्र में है। एक तरफ जहां सदियों के इंतजार के बाद भव्य मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ आज (6 जुलाई 2026) मंदिर से जुड़ी एक बहुत बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल सामने आई है।

आज अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद अहम और संवेदनशील बैठक हुई। यह बैठक मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (डोनेशन) में कथित हेराफेरी को लेकर चल रही SIT (विशेष जांच दल) की जांच के बीच बुलाई गई।आज के मुख्य बिंदु:

इस्तीफों पर विचार: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा सौंपे गए इस्तीफों पर आज की बैठक में गंभीर चर्चा हुई।

SIT की अंतरिम रिपोर्ट: बैठक में एसआईटी (SIT) की उस जांच रिपोर्ट पर चर्चा की गई, जिसमें दान पेटियों से करीब 6 से 8 लाख रुपये रोजाना गायब होने की आशंका जताई गई है। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

ट्रस्ट अध्यक्ष का बयान: राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा, “प्रभु रामलला के दरबार में चोरी होना बेहद दुखद है। दोषियों को सख्त सजा मिले, लेकिन इस पर कोई राजनीति न करे।

ऐतिहासिक सफर: 1528 से 2026 तक का पूरा घटनाक्रम

राम मंदिर का इतिहास 500 साल से भी पुराना है। नीचे दिए गए घटनाक्रम से समझिए कि यह कानूनी और धार्मिक सफर कब-कब, किस मोड़ से गुजरा:

विवाद की शुरुआत (बाबर का काल)

साल 1528: मुगल शासक बाबर के कमांडर मीर बाकी ने अयोध्या में एक विवादित ढांचे (मस्जिद) का निर्माण कराया, जिसे हिंदू पक्ष ने भगवान राम की जन्मभूमि बताया।

पहली बार कानूनी लड़ाई और एफआईआर

साल 1853 – 1858: परिसर में पहली बार सांप्रदायिक हिंसा हुई। 1858 में परिसर के भीतर हवन-पूजन करने पर ब्रिटिश काल में पहली एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। अंग्रेजों ने विवादित हिस्से के बाहर हिंदुओं को चबूतरे पर पूजा की इजाजत दी।

मूर्तियों का प्रकट होना

22-23 दिसंबर 1949: विवादित ढांचे के मुख्य गुंबद के नीचे भगवान रामलला की मूर्तियां प्रकट हुईं। सरकार ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए परिसर पर ताला लगवा दिया, लेकिन पुजारियों को दैनिक भोग और पूजा की अनुमति रही।

राम मंदिर आंदोलन की लहर

साल 1984 – 1989: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मंदिर मुक्ति आंदोलन तेज किया। 1986 में फैजाबाद कोर्ट के आदेश पर परिसर का ताला खोला गया। 1989 में पहली बार विवादित स्थल के पास राम मंदिर का शिलान्यास हुआ।

विवादित ढांचा ढहाया गया

6 दिसंबर 1992: देशभर से आए लाखों करसेवकों ने अयोध्या में विवादित ढांचे को ढहा दिया। इसके बाद यह मामला पूरी तरह कानूनी और राजनीतिक रंग ले चुका था।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

9 नवंबर 2019: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सदियों पुराने विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन हिंदू पक्ष (रामलला विराजमान) को सौंपी गई और मस्जिद के लिए 5 एकड़ अलग जमीन देने का आदेश हुआ।

भूमि पूजन और शिलान्यास

5 अगस्त 2020: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या पहुंचकर भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए पहली शिला रखी और भूमि पूजन किया।

भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह

22 जनवरी 2024: पीएम मोदी और देश-विदेश के संतों की मौजूदगी में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की नई मूर्ति की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ की गई, जिसके बाद मंदिर आम भक्तों के लिए खोल दिया गया।

निर्माण पूरा और वर्तमान स्थिति

मई – जुलाई 2026: 70 एकड़ के पूरे मंदिर परिसर का अंतिम फिनिशिंग कार्य 2026 के मध्य तक पूरा कर लिया गया। वर्तमान में (जुलाई 2026) मंदिर प्रशासन को और पारदर्शी बनाने तथा डोनेशन विवाद को सुलझाने के लिए एसआईटी (SIT) जांच और ट्रस्ट की बैठकें जारी हैं।

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