मुंगेली में तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी के खिलाफ फूटा आक्रोश, विपक्ष और राजनीतिक दलों का मिला साथ; पत्रकारों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

मुंगेली में तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी के खिलाफ फूटा आक्रोश, विपक्ष और राजनीतिक दलों का मिला साथ; पत्रकारों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी


न्यूज़लाइन नेटवर्क, छत्तीसगढ़ ब्यूरो
रायपुर :
मुंगेली जिले में पदस्थ रहे तत्कालीन सहायक संचालक एवं जनसंपर्क अधिकारी सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ वित्तीय अनियमितता, अवैध वसूली और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर की गई अशोभनीय व अमर्यादित टिप्पणियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब व्यापक राजनीतिक व सामाजिक रूप अख्तियार करता जा रहा है। मीडिया जगत में उपजे भारी आक्रोश के बीच अब राजनीतिक दलों ने भी मामले में मोर्चा खोल दिया है, जिससे शासन-प्रशासन पर त्वरित व निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।


जिले के मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन के बाद इस मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेता गणेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि पद की गरिमा को तार-तार करने वाले और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर अनर्गल लांछन लगाने वाले ऐसे अधिकारी को सेवा में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। गणेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि संबंधित अधिकारी को तत्काल शासकीय सेवा से निलंबित किया जाए, उनके खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाए तथा पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच बैठाई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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वहीं, मामले के तूल पकड़ते ही जिले में मुख्य विपक्षी दल भी पत्रकारों के समर्थन में मजबूती से उतर आया है। विपक्ष के नेता व कांग्रेस जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने अधिकारी सुजीत सिंह के इस अमर्यादित आचरण और कार्यप्रणाली की कड़े शब्दों में निंदा की है। घनश्याम वर्मा ने दो टूक कहा कि मुंगेली जिले के निष्पक्ष और समर्पित पत्रकारों का किसी भी सूरत में अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरा विपक्ष पूरी एकजुटता के साथ मीडिया के साथियों के साथ खड़ा है। उन्होंने शासन से मांग की है कि अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाए और विज्ञापनों एवं शासकीय आयोजनों के नाम पर की गई कथित अवैध वसूली की तह तक जाने के लिए प्रकरण की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए, जिससे भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की पूरी सच्चाई सार्वजनिक हो सके।
उल्लेखनीय है कि राज्यपाल को प्रेषित ज्ञापन में मुंगेली के पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी (वर्तमान पदस्थापना रायगढ़) ने अपनी पदस्थापना के दौरान मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के नाम पर मुख्यमंत्री के विज्ञापनों तथा स्वतंत्रता दिवस के विशेष आयोजनों की आड़ में विभिन्न विभागों से कथित तौर पर सुनियोजित वित्तीय अनियमितता व वसूली की। इतना ही नहीं, स्थानांतरण के उपरांत एक सोची-समझी दुर्भावना के तहत जिले के मीडिया प्रतिनिधियों के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से अमर्यादित व मानहानिकारक टिप्पणियां करते हुए उन्हें गांजा तस्कर और बिकाऊ तक कह दिया। पत्रकारों के अनुसार, संबंधित अधिकारी के ऐसे बयानों से जुड़ी गंभीर ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग्स मौजूद हैं और वर्तमान में प्रभावशील पद पर होने के कारण साक्ष्यों से छेड़छाड़ की प्रबल आशंका बनी हुई है।


इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ता पत्रकारों ने प्रशासन और शासन को दो टूक अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि दस कार्यदिवस के भीतर आरोपी अधिकारी के निलंबन और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जिले के समस्त पत्रकार न्याय की मांग को लेकर राजधानी रायपुर कूच करेंगे और अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे। लगातार मिल रहे राजनीतिक समर्थन और पत्रकारों के आर-पार के रुख के चलते अब सबकी निगाहें शासन और प्रशासनिक तंत्र के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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