आंख नहीं तो आधार नहीं : 100% दिव्यांग लीलावाई बैगा सरकारी योजनाओं से वंचित, तपती धूप में बेबस

आंख नहीं तो आधार नहीं : 100% दिव्यांग लीलावाई बैगा सरकारी योजनाओं से वंचित, तपती धूप में बेबस

आंख नहीं तो आधार नहीं : 100% दिव्यांग लीलावाई बैगा सरकारी योजनाओं से वंचित, तपती धूप में बेबस

न्यूज़लाइन नेटवर्क, स्पेशल रिपोर्ट 
शहडोल :  मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में आदिवासी विकास के दावों की पोल खोलती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो किसी का भी दिल दहला दे। ब्यौहारी तहसील के ग्राम कोईलारी की रहने वाली 100% दिव्यांग लीलावाई बैगा (पति अकाली बैगा) आज सरकारी सिस्टम की नाकामी की सबसे बड़ी गवाह बन गई हैं।

बिना आधार के सरकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ों पर

लीलावाई बैगा बचपन से ही देख नहीं सकती हैं। उनके चेहरे की बनावट में भी विकार है। इसी शारीरिक दिव्यांगता के कारण उनका आज तक आधार कार्ड नहीं बन सका है। और यही आधार कार्ड न होना उनके लिए एक अभिशाप बन गया है। बिना आधार के, उन्हें वृद्धावस्था पेंशन, विकलांगता पेंशन या विशेष रूप से आदिवासी समुदायों के लिए चलाई जा रही किसी भी सरकारी योजना (जैसे बैगा प्रोजेक्ट) का लाभ नहीं मिल रहा है।

अकेली और बेबस

लीलावाई के पास उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। 100% दिव्यांग होने के बावजूद उन्हें अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। उनकी स्थिति इतनी दयनीय है कि उन्हें रहने के लिए एक पक्की छत तक नसीब नहीं है।

तपती धूप में छप्पर का सहारा

प्रचंड गर्मी के इस मौसम में, जब सामान्य लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, लीलावाई बैगा एक फटे-पुराने छप्पर के नीचे दिन बिताने को मजबूर हैं। उनके पास पंखा, बिजली या पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। वह इस तपती धूप में बेबस होकर बैठी रहती हैं।

मुख्यमंत्री जी, ये है आपके प्रदेश की हकीकत!

यह स्थिति तब है जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी आदिवासी कल्याण के बड़े-बड़े दावे करते हैं। और तो और, ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले विधायक भी आदिवासी वर्ग से ही आते हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि वोट मिलने के बाद नेताओं को जनता की सुध लेने की फुर्सत नहीं है। क्या यह सरकार का दायित्व नहीं है कि वह ऐसे लाचार नागरिकों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाए? क्या लीलावाई बैगा जैसी नागरिक को बिना आधार के मरने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए?

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

हम प्रशासन और राज्य सरकार से मांग करते हैं कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। लीलावाई बैगा के लिए तत्काल आधार कार्ड बनवाने की विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। साथ ही, उन्हें आवास, बिजली, पानी और एक पंखा तुरंत उपलब्ध कराया जाए ताकि वे इस तपती गर्मी में कुछ राहत पा सकें। यह न केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी है, बल्कि एक मानवीय कर्तव्य भी है।

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