पश्चिम बंगाल में बकरीद पर गाय–भैंस व व खुले स्थान पर वध पर पाबंदी; सऊदी अरब में भी हज के दौरान बड़े पशुओं की कुर्बानी पर रोक

पश्चिम बंगाल में बकरीद पर गाय–भैंस व व खुले स्थान पर वध पर पाबंदी; सऊदी अरब में भी हज के दौरान बड़े पशुओं की कुर्बानी पर रोक

बकरीद के मौके पर दुनिया भर के मुस्लिम देशों में परंपरा के मुताबिक बड़ी संख्या में भेड़, बकरी, गाय-भैंस और ऊँट की कुर्बानी दी जाती है, जिसके आसपास अक्सर विवाद भी उठते रहते हैं। इस बार मामला अलग इसलिए बन गया है क्योंकि पश्चिम बंगाल की नई सरकार, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कर रहे हैं, ने 1950 के एक कानून को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। चूँकि बकरीद नज़दीक है, यह निर्णय चर्चा का विषय बन गया है।
नीति के तहत पशु वध नियंत्रण से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इसके मुताबिक बिना किसी सरकारी पशुचिकित्सक की अनुमति के गाय या भैंस का वध प्रतिबंधित होगा। किसी गाय या भैंस को तभी काटा जा सकेगा जब उसकी आयु 14 वर्ष से अधिक हो या वह शारीरिक रूप से असमर्थ हो। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं का वध करने पर भी रोक लगाई गई है।
यहाँ यह दिलचस्प है कि सऊदी अरब के पवित्र शहरों—मक्का और मदीना—में भी ईद-अल-अज़हा के दौरान गायों की कुर्बानी पर रोक है। वहां इस फैसले का धार्मिक तर्क भी दिया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार सऊदी सरकार के ‘हादी और अदाही’ कार्यक्रम के महाप्रबंधक सरेज मोहम्मद अलफिलाली ने कहा है कि हज के समय गायों और ऊँटों की कुर्बानी नहीं की जा रही है।
धार्मिक संदर्भों में कहा जाता है कि इस रस्म की शुरुआत पैगंबर इब्राहिम (अब्दुल्लाह के रूप में भी जाने जाते हैं) द्वारा की गई स्मृति से जुड़ी है, जिसके अनुसार मूल रूप से भेड़ों की ही कुर्बानी दी जाती थी। इसी कारण बड़े पशु जैसे गाय-भैंस और ऊँट की कुर्बानी पर भी सीमाएं लागू होती हैं।

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