बुंदेलखंड का प्राचीन सूर्य मंदिर बनेगा पर्यटन का नया केंद्र, UNESCO विश्व धरोहर में शामिल कराने की तैयारी

बुंदेलखंड का प्राचीन सूर्य मंदिर बनेगा पर्यटन का नया केंद्र, UNESCO विश्व धरोहर में शामिल कराने की तैयारी

बुंदेलखंड का प्राचीन सूर्य मंदिर बनेगा पर्यटन का नया केंद्र, UNESCO विश्व धरोहर में शामिल कराने की तैयारी

न्यूज़लाइन नेटवर्क, डेस्क ब्यूरो 

महोबा: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत अब वैश्विक पटल पर चमकने को तैयार है। महोबा स्थित चंदेल कालीन ‘रहीलिया सूर्य मंदिर’ को योगी सरकार अब प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और गौरवशाली इतिहास के लिए पहचाने जाने वाले इस प्राचीन मंदिर को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

कोणार्क से भी पुराना है गौरवशाली इतिहास

इतिहासकारों और विशेषज्ञों के अनुसार, रहीलिया सूर्य मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी (लगभग 890 से 910 ईस्वी) के दौरान चंदेल शासक राहिल देव वर्मन द्वारा कराया गया था। यह मंदिर स्थापत्य कला की नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण बिना सीमेंट या गारा के किया गया है। स्थानीय लोगों और शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मंदिर ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर से भी कहीं अधिक पुराना है, जो बुंदेलखंड के प्राचीन वास्तु कौशल का प्रमाण है।

योगी सरकार की विशेष पहल

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के ऐतिहासिक स्थलों को ‘सर्किट’ के रूप में विकसित कर रही है। रहीलिया सूर्य मंदिर का सौंदर्यीकरण और यहां तक पहुँचने के लिए आधारभूत संरचना (Infrastructure) को मजबूत किया जा रहा है। सरकार की इस पहल से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

विश्व स्तर पर पहचान: यूनेस्को में शामिल कराने की कवायद का मुख्य उद्देश्य इस मंदिर को वैश्विक स्तर पर पर्यटन मानचित्र पर लाना है।

सांस्कृतिक संरक्षण: सरकार बुंदेलखंड की लोक कलाओं और धरोहरों को सहेजने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत लोकगीतों (आल्हा) और पारंपरिक नृत्यों (राई) को भी वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में शोध किए जा रहे हैं।

पर्यटन की अपार संभावनाएँ

महोबा जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह सूर्य मंदिर और पास ही बना ‘सूर्य कुंड’ पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। कुतुबुद्दीन ऐबक के आक्रमणों के निशान आज भी इस मंदिर के पास मिलते हैं, जो इसके लंबे संघर्ष और इतिहास के साक्षी हैं।
राज्य सरकार के इस कदम से बुंदेलखंड का यह क्षेत्र आने वाले समय में देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन गलियारों में शामिल हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि विरासत और पर्यटन के इस संगम से उत्तर प्रदेश की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान और अधिक सशक्त होगी।

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